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Showing posts from July, 2020
कोटरी नदी
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कोटरी नदी कोटरी नदी इन्द्रावती नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। इसका उदगम छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगाँव ज़िले की मोहाला तहसील में हुआ है। इस नदी का अपवाह क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम सीमा पर राजनांदगाँव के उच्च भूमि में है। यह उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई राजनांदगाँव, कांकेर, बस्तर ज़िलों में होती हुई महाराष्ट्र में प्रवेश कर बस्तर ज़िले की सीमा पर इन्द्रावती जो कि ज़िले की सीमा बनाती है तथा इन्द्रावती नदी के उत्तरी छोर में मिल जाती है।
केन नदी
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केन नदी केन नदी केन नदी यमुना की सहायक नदी या उपनदी है, जो उत्तर भारत में बुंदेलखंड के बीच से बहती है। इस नदी की लम्बाई लगभग 230 मील है। यह नदी कैमूर पहाड़ियों की उत्तरी-पश्चिमी ढाल से निकलकर मध्य प्रदेश के दमोह , पन्ना इत्यादि क्षेत्रों से होती हुई बाँदा ज़िले में 'चिल्ला' नामक स्थान पर यमुना से मिलती है। इस नदी को 'कियाना' नाम से भी जाना जाता है। इस नदी को प्राचीन समय में 'कर्णावती', 'श्वेनी', 'कैनास' और 'शुक्तिमति' नाम से जाना जाता था। 'सोनार', 'वीरमा', 'बाना', 'पाटर' इत्यादि केन नदी की सहायक नदियाँ हैं। पथरीली घाटियों से प्रवाहित होने के कारण इसमें चलने वाली नावें यमुना नदी और केन के संगम से बाँदा तक ही आती-जाती हैं। नदी में 'पाँडवा घाट' तथा 'कोराई' नामक दो जलप्रपात भी हैं। केन नदी पर बाँध बनाकर 'बाँदा नहर' निकाली गई है। ग्रीष्म ऋतु में नहर का जलसंचार बढ़ाने के लिये गांगई के पास बाँध बनाकर एक जलाशय बनाया गया है। यह नदी केवल वर्षा ऋतु...
कृष्णा नदी
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कृष्णा नदी कृष्णा एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें :- कृष्णा (बहुविकल्पी) कृष्णा नदी अन्य नाम कृष्णवेणा देश दक्षिण भारत राज्य महाराष्ट्र उद्गम स्थल पश्चिमी घाट शृंखला , महाबलेश्वर , महाराष्ट्र लम्बाई 1,400 कि.मी. सहायक नदियाँ भीमा , तुंगभद्रा , गोदावरी , कावेरी पौराणिक उल्लेख पुराणों में कृष्णा को विष्णु के अंश से संभूत माना गया है। महाभारत सभा पर्व [1] में कृष्णा को कृष्णवेणा कहा गया है और गोदावरी और कावेरी के बीच में इसका उल्लेख है जिससे इसकी वास्तविक स्थिति का बोध होता है- 'गोदावरी कृष्णवेणा कावेरी च सरिद्वारा'। प्रवाहित क्षेत्र सांगली , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश कृष्णा नदी दक्षिण भारत की एक महत्त्वपूर्ण नदी है, इसका उद्गम महाराष्ट्र राज्य में महाबलेश्वर के समीप पश्चिमी घाट शृंखला से होता है, जो भारत के पश्चिमी समुद्रतट से अधिक दूर नहीं है। यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और फिर सामान्यत: दक्षिण-पूर्वी दि...
कावेरी नदी
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कावेरी नदी कावेरी नदी Kaveri River दक्षिण की गंगा कहलाने वाली कावेरी का वर्णन कई पुराणों में बार-बार आता है। कावेरी को बहुत पवित्र नदी माना गया है। कवि त्यागराज ने इसका वर्णन अपनी कविताओं में कई जगह किया है। भक्तगण इसे अपनी माँ के समान मानते हैं। इसके उद्गमस्थल कावेरी कुंड में हर साल देवी कावेरी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। दक्षिण की प्रमुख नदी कावेरी का विस्तृत विवरण विष्णु पुराण में दिया गया है। यह सह्याद्रि पर्वत के दक्षिणी छोर से निकल कर दक्षिण-पूर्व की दिशा में कर्नाटक और तमिलनाडु से बहती हुई लगभग 800 किमी मार्ग तय कर कावेरीपट्टनम के पास बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। कावेरी नदी में मिलने के वाली मुख्य नदियों में हरंगी, हेमवती, नोयिल, अमरावती, सिमसा , लक्ष्मणतीर्थ, भवानी, काबिनी मुख्य हैं। कावेरी नदी के तट पर अनेक प्राचीन तीर्थ तथा ऐतिहासिक नगर बसे हैं। कावेरी नदी कावेरी नदी तीन स्थानों पर दो शाखाओं में बंट कर फिर एक हो जाती है, जिससे तीन द्वीप बन गए हैं, उन द्वीपों पर क्रमश: आदिरंगम, श...
कृतमाला नदी
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कृतमाला नदी कृतमाला नदी का उल्लेख श्रीमद्भागवत [1] में हुआ है। [2] ‘ ताम्रपर्णी नदी यत्र कृतमाला पयस्विनी, कावेरी च महापुण्या प्रतीची च महानदी’ विष्णु पुराण [3] में कृतमाला नदी को 'मलय पर्वत' से उद्भूत माना गया है ‘कृतमाला ताम्रपर्णी प्रमुखा मलयोद् भवा:’ कुछ विद्धानों के मत में कृतमाला वर्तमान 'वेगा' या 'वेगवती' है, जो दक्षिण भारत के प्रसिद्ध नगर ' मदुरा ' के निकट बहती है। प्राचीन समय में कृतमाला और ताम्रपर्णी नदियों से सिंचित प्रदेश का नाम 'मालकूट' था।
कालिंदी नदी
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कालिंदी नदी कालिंदी एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें :- कालिंदी (बहुविकल्पी) कालिंदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक यमुना का ही दूसरा नाम है। कलिंद नामक पर्वत से निकलने के कारण ही यमुना को 'कालिंदी' भी कहा जाता है। भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत है। इसकी एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल ज़िले में है। यह चोटी बहुत ऊंची है। इसकी ऊँचाई लगभग 20,731 फुट है। इसे 'सुमेरु' भी कहते हैं। इसके एक भाग का नाम 'कलिंद' है। यहीं से यमुना निकलती है। इसी से यमुना का नाम 'कलिंदजा' और 'कालिंदी' भी है। दोनों का अर्थ "कलिंद की बेटी" होता है। ' महाभारत वन पर्व ' [1] में इसी को 'यमुना-प्रभव' कहा गया है- 'यमुना प्रभवंगत्वा समुपस्पृश्ययामुनम्'।
कर्मनाशा नदी
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कर्मनाशा नदी कर्मनाशा नदी वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और आरा ( बिहार ) ज़िलों की सीमा पर बहने वाली नदी जिसे अपवित्र माना जाता था। [1] इसका कारण यह जान पड़ता है कि बौद्धधर्म के उत्कर्षकाल में बिहार- बंगाल में विशेष रूप से बौद्धों की संख्या का आधिक्य हो गया था और प्राचीन धर्मावलंबियों के लिए ये प्रदेश अपूजित माने जाने लगे थे। कर्मनाशा को पार करने के पश्चात् बौद्धों का प्रदेश प्रारंभ हो जाता था इसलिए कर्मनाशा को पार करना या स्पर्श भी करना अपवित्र माना जाने लगा। इसी प्रकार अंग, बंग , कलिंग और मगध बौद्धों के तथा सौराष्ट्र जैनों के कारण अगम्य समझे जाते थे [2] । यह बात दीगर है कि पतित पावनी गंगा में मिलते ही उक्त नदी का जल भी पवित्र हो जाता है। वैसे कर्मनाशा की भौगोलिक स्थिति यह है कि वह उतर प्रदेश व बिहार के बीच रेखा बनकर सीमा का विभाजन करती है। पूर्व मध्य रेलवे ट्रैक पर ट्रेन पर सवार होकर पटना से दिल्ली जाने के क्रम में बक्सर जनपद के पश्चिमी छोर पर उक्त नदी का दर्शन होना स्वाभाविक है। कर्मनाशा नदी का उद्गम कर्मनाशा नदी का उद्गम...
कमला नदी
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कमला नदी कमला नदी कमला नदी नेपाल में हिमालय की महाभारत श्रेणियों से निकलती है। कमला नदी को घुगरी भी कहते हैं। कमला नदी नेपाल की तराई से होती हुई जयनगर की सीमा से बिहार में प्रवेश करती है। यह पहले जीवछ कमला कहलाती थी। यह मिथिला की प्रसिद्ध नदी है और पुण्य की दृष्टि से गंगा के बाद मिथिला में इसी का स्थान है। इस क्षेत्र में इस नदी को कमला माई कहा जाता है। यह दरभंगा प्रमण्डल में प्रवाहित होकर कोसी से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में सोनी, ढोरी और बलान नदियाँ हैं। वर्षा के समय नदी काफ़ी बाढ़ लाती है, जिससे काफ़ी क्षति होती है।
कन्हार नदी
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कन्हार नदी कन्हार नदी छत्तीसगढ़ राज्य में बिलासपुर ज़िले के उत्तरी-पश्चिमी भाग में स्थित खुड़िया पठार के 'बखोना' नामक पहाड़ी से निकलती है। इसका उद्गम स्थल 1012 मीटर ऊंचा है। अपने उद्गम स्थल से निकलने के बाद यह नदी उत्तर की ओर बहती हुई सामरी तहसील में 60 मीटर ऊंचे कोठरी जलप्रपात की रचना करती है। [1] इसके पश्चात् कन्हार नदी शहडोल एवं सतना ज़िले की सीमा पर सोन नदी में मिल जाती है। कन्हार नदी सरगुजा ज़िले में 3030 वर्ग कि.मी. के अपवाह क्षेत्र का निर्माण करती है। यह नदी पलामू में भण्डरिया प्रखण्ड से प्रवेश करती है। नदी झारखण्ड राज्य की उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में पलामू की दक्षिणी-पश्चिमी सीमा का निर्माण करती हुई उत्तर की ओर प्रवाहित होती है। कन्हार नदी सरगुजा को पलामू से 50 मील तक बाँटती है। पश्चिम की ओर बहती हुई यह नदी उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती है। 'सिन्दूर', 'गलफूला', 'दातरम', 'पेंगन' आदि इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं।
ईब नदी
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ईब नदी ईब नदी छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा राज्य में प्रवाहित होने वाली नदी है। यह महानदी की सहायक नदी है। ईब नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में जशपुर ज़िले के बगीचा तहसील में पाण्डराघाट में रानीझूला नामक स्थल से हुआ है। यह नदी ढाल के अनुरूप उत्तर से दक्षिण की ओर जशपुर ज़िले में बहते हुए उड़ीसा राज्य में प्रवेश कर 'हीराकुंड' नामक स्थान से 10 कि.मी. पूर्व महानदी में मिलती है। छत्तीसगढ़ में इसकी कुल लम्बाई 87 कि.मी. है। बगीचा से कुछ ही दूरी पर 'रानी का झूला' एक ऊँची पहाड़ी पर ईब नदी का उद्गम स्थल है। 'मैना' तथा 'डोंकी' ईब नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं। इसका अपवाह क्षेत्र सरगुजा के 250 वर्ग कि.मी. तथा रायगढ़ ज़िले के 3546 वर्ग कि.मी. में है। [1] ईब नदी अपनी रेत में पाये जाने वाले प्राकृतिक स्वर्ण कणों के लिए भी काफ़ी प्रसिद्ध है। यहाँ सोनझरिया इस कार्य में लगे रहते हैं।
इन्द्रावती नदी
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इन्द्रावती नदी इन्द्रावती नदी में गिरता चित्रकूट झरना , छत्तीसगढ़ इन्द्रावती नदी कालाहांडी ज़िले ( उड़ीसा ) के धरमगढ़ तहसील में स्थित 4 हज़ार फीट ऊँची मुंगेर पहाड़ी से निकलती है। यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई जगदलपुर ज़िले से 40 किलोमीटर दूर पर चित्रकूट जलप्रपात बनाती है, जो उड़ीसा के कालहंदी पहाड़ से निकलकर भूपालपटनम के पास गोदावरी में गिरती है। प्रवाह क्षेत्र इस नदी द्वारा निर्मित चित्रकूट नाम का 94 फुट ऊँचा जलप्रपात जगदलपुर के पास स्थित है। प्राचीन समय में यहाँ के क्षेत्र को ' चक्रकूट ' कहा जाता था। इन्द्रावती नदी छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र की सीमा भी बनाती है। महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ की सीमा बनाती हुई यह नदी दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है और अन्त में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश के सीमा संगम पर भोपालपट्टनम से दक्षिण की ओर कुछ दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रम 202 पर स्थित भद्रकाली के समीप गोदावरी में मिल जाती है। ...
असि नदी
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असि नदी असि नदी, वाराणसी असि नदी वाराणसी के निकट गंगा नदी में मिलने वाली एक प्रसिद्ध छोटी शाखानदी है। असि को असीगंगा भी कहते हैं। कहते हैं इस नगरी का नाम असी और वरुणा नदियों के बीच में स्थित होने के कारण ही वाराणसी हुआ था। इस नदि से संबंधित दोहे से यह भी ज्ञात होता है कि महाकवि तुलसी ने इसी नदी के तट पर संभवत: वर्तमान अस्सी घाट के पास अपनी इहलीला समाप्त की थी। ' संवत् सोलह सौ असी असी गंग के तीर, सावन शुक्ला सप्तमी तुलसी तज्यौ शरीर'
अलकनंदा नदी
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अलकनंदा नदी अलकनंदा और भागीरथी का संगम देवप्रयाग , उत्तराखंड अलकनंदा नदी कैलास और बद्रीनाथ के निकट बहने वाली गंगा नदी की एक शाखा है। यह गंगा के चार नामों में से एक है। चार धामों में गंगा के कई रूप और नाम हैं। गंगोत्री में गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है, केदारनाथ में मंदाकिनी और बद्रीनाथ में अलकनन्दा के नाम से जाना जाता है। यह उत्तराखंड में 'शतपथ' और 'भगीरथ खड़क' नामक हिमनदों से निकलती है। यह स्थान गंगोत्री कहलाता है। कालिदास ने मेघदूत में जिस अलकापुरी का वर्णन किया है वह कैलास पर्वत के निकट अलकंनदा के तट पर ही बसी होगी जैसा कि नाम-साम्य से प्रकट भी होता है। कालिदास ने अलका की स्थिति गंगा की गोदी में मानी है और गंगा से यहाँ अलकनंदा का ही निर्देश माना जा सकता है। संभवत: प्राचीन काल में पौराणिक परंपरा में अलकनंदा को ही गंगा का मूलस्रोत माना जाता था क्योंकि...
अरपा नदी
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अरपा नदी अरपा नदी अरपा नदी भी महानदी की सहायक नदी है। अरपा नदी का उदगम पेण्ड्रा लोरमी पठार में स्थित खोडरी पहाड़ी से हुआ है। अरपा नदी का प्रवाह छत्तीसगढ़ राज्य बिलासपुर ज़िले में उत्तर-पश्विम में दक्षिण की ओर होते हुए बलौदा बाज़ार में उत्तर में कुछ दूरी पर बरतोरी के समीप ठाकुरदेवा नामक स्थान पर शिवनाथ नदी में मिल जाती है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में इसकी लम्बाई 100 किमी है। अरपा नदी की सहायक नदी खारून पर रतनपुर के पास खन्दाघाट नामक जलाशय का निर्माण किया गया है।
मेघना नदी
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मेघना मेघना नदी मेघना भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के डेल्टाई भाग में एस्चुअरी [1] बनाती हुई ' बंगाल की खाड़ी ' में गिरने वाली नदी है। गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी का अधिकांश जल यह नदी समुद्र तक पहुँचाती है। यह नदी अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी लाकर बिछाती है। यह नदी कभी-कभी पाँच या छह जलधाराओं में बँट जाती है। कभी यह विशाल क्षेत्र में चादर के समान फैलकर बहती है। इस नदी के मुहाने में तीन मुख्य द्वीप हैं। इसमें साल भार नावें तथा स्टीमर सरलता से चलाए जा सकते हैं, लेकिन किनारे बलुए होने से धँस जाते हैं, जो नावों के लिये हानिप्रद है। मानसून के समय में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। [2] पूरी तरह बांग्लादेश की सीमाओं के भीतर सीमित नदियों में मेघना नदी सबसे चौड़े पाट वाली है। भोला के निकट एक बिंदु पर यह 12 कि.मी चौड़ी है। अपने अंतिम पड़ावों में यह नदी लगभग सीधी रेखा में बहती है। बहुत ही शांत एवं सौम्य दृश्य के बावजूद भी यह नदी प्रत्येक वर्ष बहुत से जा...
अनोमा नदी
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अनोमा नदी अनोमा नदी बौद्ध साहित्य में वर्णित एक प्रसिद्ध नदी है। बुद्ध की जीवन-कथाओं में वर्णित है कि सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु को छोड़ने के पश्चात् इस नदी को अपने घोड़े ' कंथक' पर पार किया था और यहीं से अपने परिचारक छंदक को विदा कर दिया था। इस स्थान पर उन्होंने राजसी वस्त्र उतार कर अपने केशों को काट कर फेंक दिया था। किंवदंती के अनुसार बस्ती ज़िला , उत्तर प्रदेश में खलीलाबाद रेलवे स्टेशन से लगभग 6 मील (लगभग 9.6 कि.मी.) दक्षिण की ओर जो कुदवा नाम का एक छोटा-सा नाला बहता है, वही प्राचीन अनोमा है और क्योंकि सिद्धार्थ के घोड़े ने यह नदी कूद कर पार की थी, इसलिए कालांतर में इसका नाम ' कुदवा' हो गया। कुदवा से एक मील दक्षिण-पूर्व की ओर एक मील लम्बे चौड़े क्षेत्र में खण्डहर हैं, जहाँ तामेश्वरनाथ का वर्तमान मंदिर है। युवानच्वांग के वर्णन के अनुसार इस स्थान के निकट अशोक के तीन स्तूप थे, जिनसे बुद्ध के जीवन की इस स्थान पर घटने वाली उपर्युक्त...